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3/8/2019 8:42:00 AM'

पुरुष प्रधान समाज में शीर्ष मुकाम बनाने वाली देश की पहली महिलाओं को सलाम

International Women's Day 2019- भारत में उन महिलाओं का एक लंबा इतिहास रहा है, जिन्होंने लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ा है और पुरुष प्रधान समाज में शीर्ष मुकाम बनाने वाली पहली महिला बनीं। ऐसी महिलाओं ने देश को गौरवान्वित किया है। देश का नाम रोशन करने वाली इन नारियों के कृतित्व-व्यक्तित्व पर पेश है विशेष सामग्री: साइना नेहवाल: 2015 में विश्व बैडमिंटन रैंकिंग में पहला स्थान पाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। मैरी कॉम: लंदन में आयोजित 2012 ओलंपिक में मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली देश की पहली महिला...

1/31/2019 9:21:00 AM'

FB पर गंदे कॉमेंट करने वालों को नहीं बख्शती यह लेडी रेसलर, कई को भिजवाया जेल

सोशल मीडिया ने एक और जहां हमें लोगों से जुड़ना सिखाया है, वहीं कुछ लोग अश्लील कॉमेंट और भद्दे मेसेजेस करके इस जगह को गंदा करने में भी लगे हैं। इन हरकतों का सबसे ज्यादा शिकार लड़कियां और महिलाएं होती हैं। हालांकि बहुत कम महिलाएं हैं, जो इसके खिलाफ आवाज उठाकर दोषी को सजा दिलवा पाती हैं। आज हम ऐसी ही एक महिला रेसलर की बात करने वाले हैं, जिन्होंने फेसबुक पर फेक आईडी बनाकर महिलाओं पर अश्लील कॉमेंट करने वाले कई आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचवाया है। चंडीगढ़ हाई कोर्ट में जुडिशल ऑफिसर के पद...

1/30/2019 11:13:00 AM'

एक बार फिर से अफगानिस्तानी महिलाये खौफ में...

अफगानिस्‍तान में शांति को लेकर तालिबान से बातचीत का जो रास्‍ता खुला है उसको लेकर अभी से ही अफगानिस्‍तान की महिलाओं में दहशत साफतौर पर देखी जा रही है। तालिबान ने वर्षों तक इस देश को दीमक की तरह चाटा है। तालिबान के ही काल में अफगानिस्‍तान के लोगों ने खासतौर पर महिलाओं ने सबसे बुरा दौर जिया है। मौजूदा समय में यह दौर वहां की हर महिला के लिए किसी बुरे सपने को फिर से याद करने वाला है। अमेरिका ने जब से अफगानिस्‍तान से अपनी सेना को वापस बुलाने का निर्णय लिया है तभी से यहां के हालातों को लेकर उसका रुख प...

1/30/2019 8:15:00 AM'

आधी आबादी के अकेलेपन का महिमामंडन

हाल ही में अखबारों ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ऑक्सफेम द्वारा जारी रिपोर्ट के बारे मे छापा। इसकी जिस बात ने सबसे अधिक सुर्खियां बटोरी ,वह थी औरतों के काम-काज की रिपोर्ट ।इसमें बताया गया कि दुनिया भर मे घरों के कामकाज और बच्चों की देखभाल के रुप मे महिलाएं जो श्रम करती है ,उसका मूल्य दस हजार अरब डॉलर है।यह दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी एप्पल के सालाना कारोबार से भी 43 गुना अधिकहै ।भारत के बारे में बताया गया कि औरतों के इस श्रम का मूल्य देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी कि जीडीपी के 31 प्रतिशत के बराबर है...

1/24/2019 7:55:00 AM'

सरोगेसी बिल

सरोगेसी दरअसल एक ऐसी चिकित्सा सुविधा है जिसके माध्यम से किसी स्त्री को गर्भाशय में किसी तरह का संक्रमण होता है या फिर वह किन्हीं दूसरी वजहों से गर्भधारण करने में सक्षम न हो। इसमें बांझपन भी शामिल है। लोकसभा में सरोगेसी यानी किराए की कोख से जुड़े नियम कानून देश में लागू हो गये। इस बिल के मुताबिक पैसे देकर सरोगेसी की सुविधा प्राप्त करना दंडनीय अपराध माना जाएगा। सिर्फ परोपकार के तौर पर इसका लाभ लिया जा सकेगा। इसके साथ ही केवल भारतीय दंपतियों को ही सरोगेसी की अनुमति होगी। वहीं सरोगेट महिला पूरी ...

1/24/2019 6:16:00 AM'

माहौल बदलने की एक बाजी

पार्टी महासचिव बनाकर कांग्रेस ने प्रियंका गांधी की उस भूमिका को ही औपचारिक जामा पहनाया है, जो वह पिछले कई वर्षों से निभाती आई हैं। परदे के पीछे उनकी राजनीतिक सक्रियता किसी से छिपी नहीं है। हाल-फिलहाल ही, 2017 में जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस का गठजोड़ हुआ था, तो उसमें उनकी बड़ी भूमिका निकलकर सामने आई थी। राहुल गांधी की मुख्य राजनीतिक सलाहकार तो वह मानी ही जाती हैं। इसीलिए सक्रिय राजनीति में उनका उतरना उतना नहीं चौंकाता, जितना कि इस वक्त उन्हें पार्टी महासचिव का पद और पूर्वी...

1/21/2019 8:05:00 AM'

मत छीनो मेरी आजादी

मै पढ़ना चाहती थी,लेकिन मुझे पढ़ने से रोका गया । मेरी जबरन शादी कराई जा रही थी। मैने इन्कार किया , तो मुझे कमरे में बंद रखा गया ,मुझे पीटा गया। मै ऐसी जिंदगी नही जीना चाहती थी।इसलिए मैने देश छोड़ने का फैसला किया। रहाफ सऊदी अरब की रहने वाली है ।उनका जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ ।पिता लोकल एरिया में टाउन गवर्नर है । दस भाई –बहनों वाले इस परिवार में किसी चीज की कमी नहीं थी,पर रहाफ खुश नही थी। परिवारकीबाकी बेटियों की तरह उन्हे घर के भीतर बंदिशो में रहना कतई गवारा नही था।वह पढ़ना चाहती थी।अपनी प...

1/18/2019 8:05:00 AM'

800 अनाथ बेटियो का जीवन संवारा

हरिद्वार की एक साध्वी कमलेश भारती ने अनाथ बच्चियों के कल्याण को अपना जीवन समर्पित कर दिया। बीते 18 सालों में उनके मातृ आंचल विद्यालय ने ऐसी 800 बेटियों का जीवन संवारने का काम किया। कमलेश द्वारा स्थापित यह विद्यालय इस पुण्य कार्य में आज भी समर्पित भाव से रत है। मथुरा रेलवे स्टेशन पर मिली एक अबोध बच्ची की परवरिश से शुरू हुआ साध्वी का यह प्रण साल-दर-साल विस्तार लेता गया। अब तक 800 से अधिक बालिकाएं यहां से शिक्षा और संस्कार प्राप्त कर समाज की मुख्य धारा से जुड़ चुकी हैं। साध्वी इस समय भी 75 अनाथ...

1/17/2019 9:40:00 AM'

71 साल में पहली बार आर्मी डे परेड का नेतृत्व करेंगी पहली महिला लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी

हर साल 15 जनवरी को भारतीय सेना द्वारा आर्मी डे मनाया जाता है औऱ परेड होती है। यह परेड 1949 से हो रही है । दरअसल इसी दिन भारतीय सेना के फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान ले ली थी। इसके बाद उन्हें भारत के पहले कमांडर इन चीफ बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। तब से इस दिन को आर्मी डे परेड के नाम से जाना जाता है। 71 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि आर्मी डे परेड का नेतृत्व कोई महिला लेफ्टिनेंट कर रही हैं। उस लेफ्टिनेंट का नाम है भावना कस्तूरी। लेफ्टिने...

1/17/2019 9:20:00 AM'

बेटियों को पढ़ाने की देश में दिखी ललक

मोदी सरकार का बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं का नारा बुलंद हो रहा है।देश मे बेटियों को पढ़ाने की ललक तेजी से बढ़ रही है ।इसका अंदाजा शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले बदलावों पर नजर रखने वाली संस्था असर की 2018 की रिपोर्ट से लगाया जा सकता है।इस रिपोर्ट के मुताबिक लड़कियों के स्कुल नहीं जाने की तादाद में भारी कमी आयी है ।वर्ष 2006 में स्कुल नजाने वाली लड़कियों(11 से 15 साल की) की संख्या 10 फीसद से ज्यादा रह गई है।यानि इनमें छह फीसद की कमी आयी है । असर की इस रिपोर्ट की इस तरह से भी समझा जा सकता है कि लड़...

1/16/2019 7:28:00 AM'

महिला अधिकारों पर सियासत

संसद के शीतकालीन सत्र में मुस्लिम महिला विधेयक 2018 लोकसभा से पारित तो हो गया, 2018 लोकसभा से पारित तो हो गया,लेकिन विपक्ष की हठधार्मिता की वजह से यह विधेयक राज्यसभा में अटक गया।विपक्ष की जमात में एनडीए के कुछ घटक दल भी शामिल हो गए है और वे इस बिल का विरोध कर रहेहै । इसमे कोई शक नही कि इस पूरे खेल के केन्द्र में वोट बैंक की राजनीति ही असली धुरी बन गई है, क्योंकि 2017 के विधेयक में तीन संशोधन के बाद लोकसभा में वह बिल पेश किया गया था। गौर करने वाली बात यह भी हैकि संशोधन विपक्ष की मांग के बाद ही क...

1/15/2019 11:13:00 AM'

महिला उद्यमियों को खरीद में हिस्सा

महिला उद्यमी सीधे सरकारी विभागों औऱ कंपनियों को अपने उत्पाद बेच सकेंगी। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि सरकारी ऑनलाइन मार्केटप्लेस ने महिला उद्यमियों और महिला स्वयं सहायता समूहों की मदद के लिए वुमनिया ऑन जीईएम पहल की शुरुआत की है ।वाणिज्य मंत्रालय की पहल के तहत महिला उद्यमी और स्वयं सहायता समूह अपने उत्पादों को सीधे विभिन्न मंत्रालयों ,विभागो और संस्थानों को बेचने में सक्षम होंगे।इनमे हस्तशिल्प एवं हथकरघा ,जूट उत्पाद,घरों औऱ कार्यालयों के साज-सजावट के सामान शामिल है।इस पहल से महिला उद्यमिता को...

1/15/2019 10:49:00 AM'

हर हफ्ते 300 जरूरतमंदों को खाने की चीजें उपलब्ध कराती हैं दसवीं में पढ़ने वाली ताइरा

दिल्ली की रहने वाली ताइरा भी दसवीं क्लास में पढ़ती हैं, लेकिन उनसे गरीबों और भूखे लोगों की हालत देखी नहीं गई इसीलिए उन्होंने उनके लिए कुछ करने का प्लान बनाया और वे अपन छोटी कोशिश के जरिए लोगों की जिंदगी में खुशियां लाने का काम कर रही हैं। जब आप दसवीं क्लास में थे तो आप किन चीजों में व्यस्त रहा करते थे? बोर्ड एग्जाम्स, मस्ती, खेल कूद और शायद आगे की पढ़ाई के बारे में? क्या आपने उस उम्र में कभी सोचा कि हमारे आस पास गरीब और सुविधाओं से विपन्न लोगों को अपनी जिंदगी चलाने में इतनी मुश्किलें क्यों आत...

1/14/2019 10:15:00 AM'

अपनी ही इस समस्या को लेकर अनभिज्ञ हैं भारत की 71 प्रतिशत महिलाएं, शर्म है बड़ी वजह

हालिया शोध बताता है कि भारत में लगभग 71 प्रतिशत लड़कियों को मासिक धर्म के बारे में कुछ भी नहीं पता है। इसके बारे में जागरूकता की कमी एक लड़की को, कभी-कभी 10 साल की उम्र में, मानसिक आघात की समस्या दे सकती है। सामाजिक कलंक और शर्म की भावना के कारण मासिक धर्म से कई बार महिलाओं को भारी समस्या झेलनी पड़ती है। ग्रामीण भारत में लगभग 80 प्रतिशत लड़कियां माह में तीन से चार दिन स्कूल मिस कर देती हैं, और यह अक्सर मासिक धर्म की शुरुआत के समय होता है। यह सैनिटरी पैड के उपयोग के बारे में जागरूकता की कमी से हो...

1/12/2019 7:34:00 AM'

प्रभाव महिला मताधिकार का

लिंग समानता के मामले में 169 देशों में भारत का स्थान 130वां है परंतु जब बात महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी की आती है तो मामला एकदम अलग हो जाता है क्योंकि यह केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया में हिस्सा लेने, राजनीतिक सक्रियता, राजनीतिक जागरूकता आदि तक ही सीमित नहीं है। देश के स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी बेहद मजबूत तथा सभी क्षेत्रों से जुड़ी थी। अनेक महिलाएं जेल गईं, धरने पर बैठीं और अन्य कई तरह से आंदोलन में भागीदारी की परंतु राजनीतिक भागीदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू मताधिकार का पालन भी...







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