महिलाएं बना रहीं वायुसेना के खास पैराशूट

महिलाएं बना रहीं वायुसेना के खास पैराशूट

कानपुर की आर्डिनेस फैक्टरी की महिला विंग(सी-3) समय से पहले उसको दिए गए लक्ष्य को तो पूरा कर ही रही है अव्वल किस्म का उत्पाद भी तैयार कर रही है। उत्साह ,कड़ी मेहनत और कुछ अलग करने की चाह का ही नतीजा है कि महिला विंग की उत्पादन क्षमता पुरुषों के मुकाबले तीन फीसदी ज्यादा है ।इतना ही नहीं ,देश में पहली बार इस बिंग में रिकॉर्ड समय मे लड़ाकू विमानों के पैराशूट तैयार किए है ।

पुरुषों पर भारी सी -3 वर्कशॉप

पैराशूट देश की रक्षा में प्रयोग हे वाला अत्यन्त महत्वपूर्ण उत्पाद है ।युद्धक विमानों,बमों और दुर्गम क्षेत्रों में इसके बिना जाने की कल्पना भी नही की जा सकती है।ऐसे अहम उत्पादों को बनाने का जिम्मा महिला विंग यानी लेडीज वर्कशाप के हवाले है ।इसे सी-3 कहा जाता है।जिसमें 61 महिला कर्मचारी और अधिकारी है ।

रिकार्ड समय में बनाए इल्यूमिनेटिंग पैरा

फैक्ट्री  में पहले महिलाओं के जिम्मे दास्ताने ,जैकेट ,जैसे उत्पाद थे। एक साल पहले महिलाओं की अलग विंग सी -3 स्थापित की गई है ।

बच्चे अपनी मां के पास इसलिए भी बढ़ी उत्पादकता

कामकाजी महिलाओं  के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने बच्चों की परवरिश होती है ।इसे समझते हुए पहली बार पैराशूट फैक्ट्री के अंदर शिशु गृह यानी क्रेच खोला गया है ।7 फरवरी को इसका एक वर्ष पूरा होगा।मां अपने बच्चों के नजदीक रहती है ।जिससे वह बेफिक्र होकर काम करती है । मौजूदा समय में 26 बच्चों की देखभाल हो रही है ।

युवा महिला अधिकारियों ने बदली तस्वीर

इस समय पैराशूट फैक्ट्री के प्रशासन की बागडोर युवा प्रशासनिक महिला अधिकारी आइशा खान के हाथ में है । उप महाप्रबंधक प्रतीक्षा सैनी योजनाबद्ध तरीके से उत्पादन के नए रिकार्ड गढ़ रहीहै । वित्त नियंत्रक की कमान पूजा भट्ट के पास है और स्टाफ की सेहत की देखरेख डॉ.य. ज्योति त्रिवेदी कर रही है । पैराशूट फैक्ट्री के महाप्रबंधक जी सी राउत है ।

देश की एकमात्र महिला विंग

  • देश की इकलौती महिला विंग बना रही लड़ाकू विमानों के पैराशूट
  • देश की 41 आर्डिनेस फैक्ट्रीयो में एकमात्र कानपुर में है लेडीज वर्कशाप
  • महिला सशक्तिकरण की दिश में पहल, 2017 में गठित हुई सी -3 विंग

क्यों है उत्पादन क्षमता अधिक

  • अफसर हर वक्त प्रेरणा देते रहते है
  • फैक्ट्री में घर जैसा माहौल
  • कार्यस्थल पर ही क्रेच खोलने से मदद
  • अफसर खुद ज्यादा काम कर कनिष्ट कार्मियों के सामने पेश करते है उदाहरण
  • अच्छा काम करने पर हाथो-हाथ मिलती है शाबाशी इनाम
  • गलती पर अफसर डांटने नहीं समझाते है ।

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