अपनों से नाउम्मीद वृद्ध ने खुद की तेरहवीं

अपनों से नाउम्मीद वृद्ध ने खुद की तेरहवीं

मध्यप्रदेश में बालाघाट से लगी ग्राम पंचायत गोगलई में मंगलवार को 75 वर्षीय वृद्ध संतलाल सिल्हारे उर्फ पोंगी महाजन ने मरने के बाद अपनों से मोक्ष की आस पूरी होती न देख स्वयं का पिंडदान कर तेरहवीं का भोज ग्रामीणों को कराया।वह स्वयं के गंगापूजन कार्यक्रम में भी शामिल हुए।

संतलाल कबाड़ का व्यापार करते है ।उनके दो बेटो व दो बेटी है,जिसमें से छोटे बेटे की मौत हो चुकी है और बेटा उनसे अलग हो कर अपने परिवार के साथ रहता है । संतलाल छोटी बहू व पोती के साथ रहते है ,लेकिन मरने के बाद किसी के द्वारा अपना क्रियाकर्म करने की उम्मीद होता न देख उन्होंने जीते जी ही अपना क्रियाकर्म करने का निर्णय लिया।

शोक की जगह बांटा शुभ संदेश

परिवार मे किसी की मौत होने के बाद परंपरानुसार मरने वाली की आत्मा को शांति के लिए पिंडदान,गंगापूजन व तेरहवीं के कार्यक्रम किए जाते है ।इशकी सूचना शोक संदेश के जरिए दी जाती है ।अपनीही तेरहवीं में लोगोंको शामिल करने लिए संतलाल ने शोक संदेश के बदले शुभ संदेश का कार्ड छपवाया और इसमेंसभी से 29 जनवरी को कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने का निवेदन किया । संतलाल ने 20 जनवरी को अपना पिंडदान रजेगांव स्थित नदी के घाट पर किया है ।इसके बाद मंगलवार को गंगापूजन व तेरहवीं के कार्यक्रम के बाद रात कीर्तन भजन का कार्यक्रम किया।

कर सकते हैं पिंडदान

संतलाल के तेरहवीं व गंगापूजन कार्यक्रम कोसंपन्न कराने पहुंचे नैतरा के पंडित तावेलप्रसा तिवारी ने बताया कि अपने जीवन के मोक्ष के लिए मनुष्य स्वयं की तेरहवीं कर सकता है। इससे मनुष्य को संतुष्टि होगी कि उसने अपने पाप,पुण्य कर्म से मुक्ति पाने के लिए कुछ बेहतर करने का प्रयास किया है । मरने के बाद मनुष्य को क्या पता कि उसके साथ क्या हो रहा है और उसके परिवार वाले उसके मोक्ष के लिए क्या कर रहे है ।शास्त्रों के अनुसार भी मनुष्य मोक्ष की प्राप्तिके लिए अपना पिंडदान कर सकता है ।महाभारत में भी भीम ने मोक्ष के लिए पिंडदान करवाया था।

dainik jagaran